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19 June 2018

भाती रही चाँदनी

जब से सँभाला होश मेरी काव्य चेतना ने
            मेरी कल्पना में आती-जाती रही चाँदनी 
आधी-आधी रात मेरी आँख से चुरा के नींद
            खेत खलिहान में बुलाती रही चाँदनी 
सुख में तो सभी मीत होते किन्तु दुख में भी
            मेरे साथ साथ गीत गाती रही चाँदनी 
जाने किस बात पे मैं चाँदनी को भाता रहा
            और बिना बात मुझे भाती रही चाँदनी 


-उदयप्रताप सिंह

24 July 2016

मीरा के भजन में था

मीरा के भजन में था जाने कौन जादू छुपा
जो कि चुटकी बजाते नाचते गुपाल थे
पल भर भी विलम्ब करना था अचरज
ऐसी मोहिनी सहेजे अश्रु के प्रवाल थे
होकर विभोर किनकाती थी मंजीरा जब
घनस्याम राग में नहाते स्वर-ताल थे
विष के न घूँट कैसे धारते सुधा का रुप
कण्ठ पर अँजुरी लगाये नन्दलाल थे।

-बदन सिंह मस्ताना

धनबल भुजबल

धनबल भुजबल हरबल व्यर्थ का है
कोई बल मीत तेरे काम नहीं आना है
पाप से हटा के पुण्य में लगा ले जिन्दगानी
साँस छूटते ही छूट जाना ये खजाना है
हरे राम, हरे कृष्ण रसना से रट नित
ऋषि मुनियों ने जिसे मुक्ति-पथ माना है
कंचन से ज्यादा अनमोल जिसे समझा है
माटी का शरीर, माटी में ही मिल जाना है।

-बदन सिंह मस्ताना

11 June 2016

प्रेम की पवित्र

प्रेम की पवित्र अभिनन्दनीय वादियों में,
जाने कौन सी बयार पत्तियों को छू गयी।
चाहत की चाँदनी सिहर गयी पोर-पोर,
आहत हुई तो ओस बनकर चू गयी।
भावना के रंग भेद-भाव के शिकार हुए,
अपनों से दूर अपनों की खुशबू गयी।
गाँव-गाँव गाते रहे भजन कबीरदास,
किन्तु किसी मन से न मैं गया न तू गयी।।

-डा० अशोक अज्ञानी

जनता के दुःख-दर्द

जनता के दुःख-दर्द का नहीं निवार करे,
ऐसा कोई राजा हो या रानी किस काम की।
भूखे नंगे दीनन को दे सके न कोई लाभ,
शासन की वो मेहरबानी किस काम की।
देशप्रेम देशभक्ति भावना से भरा नहीं,
ऐसा कोई गीत या कहानी किस काम की।
देश की आन वान शान पर न दे दे जान,
निरझर ऐसी भी जवानी किस काम की ।।

-सत्येन्द्र निर्झर