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13 July 2022

बदनाम व्यर्थ हो जाएंगे

पुरवा बयार जैसे कटार 
सुरबाला सा सोहे सिंगार,
मुस्काओ न मुझको निहार
बदनाम व्यर्थ हो जाएंगे, 
दोनों ही कहीं खो जाएंगे।

मेरा जीवन तृष्णा का घर
तुम हो तृप्ति लोक की रानी।
बिजली जैसे अंग दमकते,
रूपसि तुम हो एक कहानी ॥
मैं अन्धकार, मैं अंधकार, 
करना न मुझे तुम तनिक प्यार,
कहता हूँ तुमसे बार-बार, 
उपनाम व्यर्थ हो जाएंगे।

मैं नदिया का बहता पानी,
लक्ष्मण रेखा तेरा गहना।
नीरवता वासना न रच दे.
आग फूस में दूरी रखना ॥
मेरी आशाएं हैं अपार, 
तू मादकता का मंदिर ज्वार,
संयम ने मानी अगर हार, 
कोहराम व्यर्थ हो जाएंगे।

मन आराधक बना तुम्हारा,
हूर कोई हो या हो देवी।
ताजमहल की वंशज लगतीं,
बोल तुम्हारे अन्तर वेधी ॥
अब लो पुकार, दो सौंप भार, 
हैं 'पवन' सदन के खुले द्वार,
यदि उतर गया यौवन ख़ुमार, 
नीलाम व्यर्थ हो जाएंगे।

-पवन बाथम 

07 July 2022

जब से यह देखे हैं बतियाने नैन

जब से यह देखे हैं बतियाने नैन
फूलों की बरसा से बरसाते बैन
डोल गया.. डोल गया ... डोल गया मन
जीवन में आया नयापन

प्यार भरे मौसम की भाषा है मौन
अन्तर पट जान गया है कितना  कौन
एक दूसरे को आओ नैन मूँद देखे
जंजाली दुनिया को एक ओर फेकें
प्राण हमें एक मिला गूँगे दो तन।
जीवन में आया नयापन

सांसों में घुलने लगी चम्पा की गंध
सदियों के टूट गए सारे अनुबंध
कल्पना के पंखों से आसमान छूलें
और कभी भावों के झूले पे झूले
होने पाए कभी प्रीति अपावन।
जीवन में आया नयापन

अलकों संग खेल रही चन्दनी बयार
झुकी-झुकी पलको में मुस्काए प्यार
फूल से कपोल  हुए शर्म से गुलाबी
मदमाते नैन लगें जन्म के शराबी
कर रहा है तुमपे पवन तन मन अर्पन
जीवन में आया नयापन 
-पवन बाथम