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16 March 2014

लगता है अब कोई यार नहीं आएगा होली में

-ओमप्रकाश यती

डिप्टी साहब का परिवार नहीं आएगा होली में
छोटा वाला भी इस बार नहीं आएगा होली में

प्यारेमोहन ने दिल्ली से कल ही घर पर फ़ोन किया
बच्चा उसका है बीमार, नहीं आएगा होली में

कॉलिज की छुट्टी है लेकिन कोचिंग बंद नहीं होगी
रामनरायन है लाचार, नहीं आएगा होली में

दीपक की साली कुछ दिन को ‘सूरत’ आने वाली है
बोल रहा था अबकी बार नहीं आएगा होली में

अब किसको फ़ुरसत है भइया गाँव किसे याद आता है
लगता है अब कोई यार नहीं आएगा होली में

-ओमप्रकाश यती
[फेसबुक से साभार]

26 January 2013

गणतन्त्र-दिवस है


-ओमप्रकाश यती

आओ ख़ुशी मनाएँ कि गणतन्त्र-दिवस है
सबको गले लगाएँ कि गणतन्त्र-दिवस है

हम शेख़-बरहमन नहीं हैं, भारतीय हैं
सब मिल के गुनगुनाएँ कि गणतन्त्र-दिवस है

मौसम ने पूछा,किसलिए ये मस्तियाँ इतनी
कहने लगीं हवाएँ कि गणतन्त्र-दिवस है

हत्या,बलात्कार,डकैती के शोर को
अब भी चलो दबाएँ कि गणतन्त्र-दिवस है

जो चोट कर रहे हैं रोज़ संविधान पर
वे आज तो शर्माएँ कि गणतन्त्र-दिवस है

वो कौन है जो आंसुओं को पोंछता नहीं
चलकर उसे बताएं कि गणतन्त्र-दिवस है

दे देंगे जान देश पुकारेगा जब ‘यती’
आओ कसम ये खाएं कि गणतन्त्र-दिवस है

-ओमप्रकाश यती

14 April 2010

ओमप्रकाश यती की दो गजलें-

हिन्दी के प्रसिद्ध गजलकार ओमप्रकाश यती की दो गजलें-

--1--

नदी कानून की, शातिर शिकारी तैर जाता है
यहाँ पर डूबता हल्का है भारी तैर जाता है

उसे कब नाव की, पतवार की दरकार होती है
निभानी है जिसे लहरों से यारी, तैर जाता है

बताते हैं कि भवसागर में दौलत की नहीं चलती
वहाँ रह जाते हैं राजा भिखारी तैर जाता है

समझता है तुम्हारे नाम की महिमा को पत्थर भी
तभी है राम! मर्ज़ी पर तुम्हारी तैर जाता है

निकलते हैं जो बच्चे घर से बाहर खेलने को भी
मुहल्ले भर की आँखों में ‘निठारी’ तैर जाता है

–ओमप्रकाश यती


--2--

दुख तो गाँव–मुहल्ले के भी हरते आए बाबूजी
पर जीवन की भट्ठी में ख़ुद जरते आए बाबूजी

कुर्ता, धोती, गमछा, टोपी सब तो नहीं जुटा पाए
पर बच्चों की फ़ीस समय से भरते आए बाबूजी

बड़की की शादी से लेकर फूलमती के गवने तक
जान सरीखी धरती गिरवी धरते आए बाबूजी

कुछ भी नहीं नतीजा निकला, झगड़े सारे जस के तस
पूरे जीवन कोट–कचहरी करते आए बाबूजी

कभी वसूली खाद–बीज की कभी नहर के पानी की
हरदम उस बूढ़े अमीन से डरते आए बाबूजी

नाती–पोते वाले होकर अब भी गाँव में तन्हा हैं
वो परिवार कहाँ है जिस पर मरते आए बाबूजी

–ओम प्रकाश यती


ओम प्रकाश यती की अन्य गजलों के लिए देखिए-
www.omyati.blogspot.com/