16 April 2005

मेरी पसंद


अजनबी शहर में ता–उम्र रहे यह हशरत ।
बन के अपना कोई रूठे तो मनाऊँ उसको ।।
–ज्ञान प्रकाश विवेक


धरती अति सुन्दर किताब
चाँद सूरज की जिल्द वाली
पर खुदाया यह दुख—
भूख‚ सहम और गुलामी
यह तेरी इबादत है
या प्रूफ की गलतियाँ।
॥अमृता प्रीतम॥

जिसे बनाया वृद्ध पिता के श्रम जल ने
दादी की हँसुली ने माँ की पायल ने
उस कच्चे घर की कच्ची दीवारों पर
मेरी टाई टँगने में कतराती है।
॥डा० कुँवर बेचैन॥

नए कमरों में अब चीजें पुरानी कौन रखता है
परिन्दों के लिए शहरों में पानी कौन रखता है
हमीं गिरती हुई दीवार को थामे रहें वरना
सलीके से बुजुर्गो की निशानी कौन रखता है।
–मुनब्बर राना


बेवज़ह मन पै कोई बोझ न भारी रखिये
ज़िन्दगी जंग है इस जंग को जारी रखिये।
॥ डा० उर्मिलेश॥
बेटियाँ शुभ कामनाएँ हैं
बेटियाँ जातक कथाएँ हैं
बेटियाँ जीनत हदीसों की
बेटियाँ गुरु ग्रंथ की वाणी
बेटियाँ वैदिक ॠचाएँ हैं
जिनमें खुद भगवान बसता है
बेटियाँ वे वंदनाएँ हैं।
—अजहर हाशमी

भूख की कुटनी कला की कुलवधू को
नग्नता की हाट में बिठला रही है
फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे
ये हथेली आज फिर खुजला रही है।
॥ शिवओम अम्बर॥

करते हैं तन मन से वन्दन

जनगण मन की अभिलाषा का
आराधन अपनी संस्कृति का
अभिन्दन अपनी भाषा का।
॥सोम ठाकुर॥


जिन चिरागों को हवाओं का खौफ नहीं

उन चिरागों को बुझने से बचाया जाये
घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाये।
॥ निदा फाज़ली॥

11 comments:

अनूप भार्गव said...

व्योम साहब:

पढ कर आनन्द आ गया । बहुत ही सुन्दर चयन है कविताओं का । एक एक कविता रतन के समान है।

अनूप

Anonymous said...

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Anonymous said...

प्रिय द्विज तुमने यह बेवसाइट देखी और अपनी प्रतिक्रिया भी लिखी। बहुत अच्छा लगा। तुम्हारी प्रतिक्रिया पढ़कर।
ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ।
-डॉ॰ जगदीश व्योम

Anonymous said...

this website is good
students of class9th.k.v.
spm hoasangabad

Anonymous said...

Thanks Really Gud to see this work..
I am at US fremont belong to MP Khargone ...were going though
www.bhaskar.com then saw you site address as news ...really gud work
like it

Prashant Kumar Dubey said...

Priya vyom ji,
Shubhkamnayein,

Gorvanvit mahsoos kar raha hoon ki main hoshangabaad jile ka nivasi hoon. sundar chayan ke liye badhai. meri bhi kuch rachnayein hain, aap tak avashya pahunchaunga.

Aapka hiteshi
Prashant dubey
Shobahpur, distt: Hoshangabad
M.P.(BHARAT)
0755-2461161
09425026331

Sudeep Sakalle said...

आदरणीय व्योम जी

आपका ब्लोग पद कर बहुत आछ्चा लगा

आभार
सुदीप साकल्ले
www.kanhaiya.com/infovnity

Dr. Chandra Kumar Jain said...

wonderful and thought provoking collection.please keep it up. many more poems can be added but mentain this flavour.such verses are a kind of treasure for manking which should not be beyond its reach. doubtlessely you have done a remarkable attempt, worth and admirable.

Dr. Chandra Kumar Jain said...

WONDERFUL, INSPIRING AND WORTH COLLECTION. THANKS, PLEASE KEEP IT UP.

Anonymous said...

कुछ वि‍चारों में काफी गहराई है, आशा है भवि‍ष्‍य में इसी तरह के और भी वि‍चार पढने को मि‍लेंगे

मनोज आर्य

Anonymous said...

ADARNEEYA SHIV OM AMBAR KE SAMAYPARAK CHINTAN AVAM USKI ABHIVYAKTI SE VAHUT PRABHAVIT HUA. SADHUVAAD !
NIRMAL, GR NOIDA