05 September 2017

आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ


(हिन्दी माह में पूर्व वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी श्री विनोद चन्द्र पाण्डेय की एक कविता सभी हिन्दी प्रेमियों के लिए)

स्वरों व्यंजनों से परिनिष्ठत, है वर्णों की माला,
शब्द-शब्द अत्यन्त परिष्कृत, देते अर्थ निराला
उच्चकोटि के भाव निहित हैं, नित प्रेरणा जगाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ

व्यक्त विचारों को करने का, यह सशक्त माध्यम है,
देवनागरी लिपि अति सुन्दर सर्वश्रेष्ठ उत्तम है
इसकी हैं बोलियाँ बहुत सी इसे समृद्ध बनाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ

उच्चारण, वर्तनी सभी में, इसको सिद्धि मिली है,
है व्याकरण परम वैज्ञनिक, पूर्ण प्रसिद्धि मिली है
इसके अदर सम्प्रेषण का अनुपमय गुण पाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ

हिन्दी सरल, सुबोँ, सरस है नहीं कहीं कठिनाई,
जो भी इसे सीखना चाहें, लक्ष्य मिले सुखदाई
काम करें हम सब हिन्दी में इसकी ख्याति बढ़ाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ


कवियों ने की प्राप्त प्रतिष्ठा, रच कविता कल्याणी
गूँज रही है अब भी उनकी, पावन प्रेरक वाणी
हम इसकी साहित्य-सम्पदा, भूल न किंचित जाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ

ओजस्वी कविताएँ लिखकर अमर चन्द बरदाई,
अमिट भक्ति की धारा तुलसी ने सर्वत्र बहाई
सूर, कबीर, जायसी की भी कृतियाँ हृदय लुभाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ

केशव, देव, बिहारी, भूषण के हम सब आभारी,
रत्नाकर, भारतेन्दु उच्च पद के सदैव अधिकारी
महावीर, मैथिलीशरण, हरिऔध सुकीर्ति कमाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ

पन्त, प्रसाद, महादेवी का योगदान अनुपम है,
देन ‘निराला’ की हिन्दी को परम श्रेष्ठ उत्तम है
दिनकर, सोहनलाल द्विवेदी राष्ट्र-भक्ति उपजाएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ

करें प्रयोग नित्य हिन्दी का, रक्खें अविचल निष्ठा,
ऐसा करें प्रयास कि जिससे, जग में मिले प्रतिष्ठा
हिन्दी का ध्वज अखिल विश्व में मिलजुल कर फहराएँ
आओ आओ हिन्दी भाषा हम सहर्ष अपनाएँ
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         -विनोद चन्द्र पाण्डेय ‘विनोद’
आई.ए.एस.(अ.प्रा.)
पूर्व निदेशक
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ

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